कनेरी


एक बहुत ही पिछड़ा गाँव था जिसका नाम था जल्लाद्गढ़ | जैसाकि गाँव का नाम है वैसा ही लोगो का स्वाभाव था | किसी भी व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति से कोई हमदर्दी नही थी |उस गाँव में तो मानवता का कही नामोनिशान तक न था | 
उसी गाँव में रहती थी एक चौदह वर्ष की लड़की जिसका नाम था कनेरी | उसके माता – पिता निर्धनता से ग्रस्त थे कनेरी के पांच भाई- बहन और थे जिसके कारण उनकी स्थति और भी बद्तर हो गयी थी | कभी-कभी तो उन्हें भोजन तक नसीब नही होता था | वे अपने जीवन से बेहद परेशान थे | तब उन्होंने कनेरी के विवाह के बारे में सोचा केवल चौदह वर्ष की कनेरी का विवाह उससे कही बड़े अयोग्य व्यक्ति के साथ तय कर दिया गया | जब कनेरी ने अपने विवाह के बारे में सुना तो उसके पैरों तलें की जमीन ही खिसक गयी परन्तु वह क्या करती विवश थी और साथ ही अशिक्षित भी |
  कनेरी की शादी क्या हुई उस पर विपत्तियों का पहाड़ ही टूट पड़ा उसे अपनी क्षमता से अधिक कार्य अपनें ससुराल में करना पड़ता था | उसकी सास हमेशा उसे दहेज़ न लाने के कारण ताने सुनाया करती थी |वह आंसुओ के घूंट पी कर घुट –घुट कर  जी रही थी | उसे किसी भी प्रकार की कोई आज़ादी नही थी | उसकी हालत बंधुआ मजदूर की भांति हो गयी थी | खेलने –कूदने की उमर में उसे घर-गृहस्थी के कार्य सँभालने पड़ रहे थे | उसके साथ अवमानविय व्यवहार किया जाता था | कभी –कभी तो भोजन भी नसीब नही होता था | उसकी हालत पालतु पशु की भांति हो गयी थी |
    कुछ ही साल बाद कनेरी को पता चला कि वह माँ बनने वाली है तब तो उसकी स्थिति और भी ख़राब हो गयी | इस छोटी उमर में जब वह स्वयं को संभाल नही सकती थी तो वह उस बच्चे को कैसे संभाल पाती | उसका जीवन नर्क से भी बद्तर हो गया था |
कुछ ही दिनों बाद वह माँ बन गयी उसका बच्चा बहुत ही कमजोर था व उसकी स्थिति भी बहुत ही नाजुक हो गयी थी परन्तु अभी उसके बच्चे के जन्म को एक महिना भी नही हुआ हुआ था कि उसके ससुराल वालो ने उसे फिर से सताना शुरु कर दिया उससे और भी अधिक कम लेना शुरु कर दिया अब तो वह और भी कमजोर हो गयी थी उसे अपने जीवन से घृणा होने लगी थी वह उस जीवन से मुक्त होना चाहती थी |
  एक दिन जब वह खेत में कम कर रही थी तब उसकी साथी श्रमिक सहेलियों ने उसे देखकर उसकी कमजोरी का कारण पूछा पहले तो वह घबराई परन्तु जब आस –पास किसी को न देखा तो उसने अपनी आप –बीती कह सुनाई वह रो पड़ी सिसकियाँ लेने लगी | उसकी सहेलियों ने उसके प्रति सहानुभूति दिखाई अब तो कनेरी अपनी सहेलियों से रोज छिप –छिप कर मिलने लगी उनमें से कुछ थोड़ी शिक्षित भी थी उन्होंने उसे बाल - विवाह के बारे में जानकारी दी व पुलिस स्टेशन में एक F.I.R. पत्र के माध्यम से कनेरी की तरफ से भिजवाया |
  पुलिस एक ही दिन में कनेरी के घर पहुंची व मामले की जाँच-पड़ताल करने के पश्चात दोषी व उसके साथ सम्मिलित लोगो को काल-कोठरी में बंद कर दिया कनेरी को यूनिसेफ़ के द्वारा आरक्षण प्रदान किया गया व उसके बच्चे के पालन-पोषण के साथ कनेरी को शिक्षित भी किया गया |
वर्तमान युग में कनेरी की तरह ही देश के कई स्थानों पर कितनी ही लड़कियों का बचपन बर्बाद हो रहा है उनसे उनकी स्वतंत्रता का अधिकार भी छिना जा रहा है | आज आवश्यकता है सरकार इन पिछड़े क्षेत्रों में भी विकास कार्य करें व उन बच्चों की जो एक अच्छा जीवन जीना चाहतें है उनकी आकांक्षाओं को पूरा करें | 
क्या उन्हें अच्छा जीवन जीने का अधिकार नही मिलना चाहिए ? 
---प्रशांत गाहिरे 



Comments

parimal

good one brother :)