अगले जनम मोहे भगवान न किजों


होली की शाम का वक़्त था | हम सब को मौसी जी के यहाँ होली मिलने जाना था | मम्मी –पापा गाड़ी से जाने वाले थे और मुझे और भईया को ऑटो से जाना था |

               मम्मी ने दोनों भाइयों को पहले निकलने के लिए बोला | क्योंकि हमे कुछ दूर पैदल चलना पड़ता ऑटो लेने के लिए औए उसके बाद ऑटो से उतरकर फिर पैदल जाना था | दोनों लोग निकल कर चौराहें पे पहुच गये |”यार आज ऑटो ज्यादा नही चल रहें “ | भईया ने कहा –“होली है, सब छुट्टी मन रहे है “| मैंने कहा |

               करीब दस मिनट बाद एक ऑटो मिला | “भईया काली मंदिर चौराहा चलोगे ?” भईया ने पूछा | “बैठिये भैया “ |

जैसे ही हम काली मंदी चौरहा पहुचें , भैया ने कहा कि दर्शन करते हुए चलते है |

“चलो ठीक है|”

काफी भीड़ थी मंदिर में | तो जूता गायब होने के डर से एक –एक करके हम लोग गये | पहले मै गया और दस सेकंड में हाथ जोड़ के चला आया | फिर भैया गये और पहले वो बहुत देर तक हाथ जोड़ के प्रार्थना करते रहे | फिर पंडित जी ने उन्हें जोर से घंटी बजाने को कहा उस समय मंदिर में आरती हो रही थी |

               टन –टन ,,,,,,,,,,,,,,,, मंदिर की सभी घंटियाँ बहुत जोर-जोर से बजायी जा रही थी | लोग भजन गा रहे थे | मै बाहर खड़ा सब देख रहा था | उसकी आवाजें मुझे परेशान कर रही थी |तभी एक झटके  में मुझे काली देवी का चेहरा दिखा | अगर सारी गड़ना की जाये तो कुल तैतीस –करोड़ देवी-देवता और उनके अरबों मंदिर और उन मंदिरों में घंटो तक पूजा करने वाले लोग और इतना शोर की पूछो मत |

               एक बार अगर भगवान के नजरिये देखा जाये तो इतने लोग हर वक़्त भगवान को परेशान करते रहते रहे न जाने किस बात का रोना रोते है लोग |सब कुछ तो दे दिया है तुम्हे फिर क्या मांगते रहते है ?और ये भी नही की प्यार से मांगना | इतना जोर करके प्रताड़ित करना ईश्वर को |

ये लालच, ये तमाशा देख के भगवान भी सोचता होगा कि यार मै भगवान क्यों बना ? काश ! मै बदनसीब किसी से कह पता की “अगले जनम मोहे भगवान न किजों |”|

------समीर



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