सच्चा देशभक्त : बास्को


यह एक सच्ची घटना है जो दो दशक पहले की है जब भारतीय सेना कश्मीरी घुसपैठियों के खिलाफ संघर्ष कर रही थी 
कारगिल सेक्टर के बेस कैंप में सेना के मास्टर मेजर नारायण राणा अपने सर्च डॉग बास्को के साथ रोज लैंडमाइंस की खोज पर जाया करते थे हर रोज के भांति उस रोज भी सर्द हवाएं चल रही थी सुबह के करीब 8 बजे थे और मेजर राणा अपने समझदार साथी बास्को के साथ गश्त पर थे सेना के इस समझदार डॉग की सूझबूझ ने कई बार बड़े हादसों को टाला था इसलिए सब उसकी काबिलियत पर काफी भरोसा करते थे |
उस दोपहर वहां से सेना के अफसरों का एक बड़ा काफिला गुजरने वाला था इसलिए हर संभव सावधानी बरती जा रही थी 
कैंप के गेट के बाहर स्थानीय निवासी कादिर की चाय की दुकान थी जहा अक्सर जवान आया जाया करते कादिर सेना को संदिग्धों की मुखबिरी भी किया करता था इसलिए मेजर भी वहां अक्सर रुका करते थे और कादिर से उनकी अच्छी जमती थी 
उस रोज कादिर की दुकान पर एक अजनबी भी था और और बातचीत में उसने मेजर से वहां रोजगार के लिए आए होने की बात कही लेकिन आज हमेशा अपनी धुन में रहने वाला बास्को उस पर काफी भौंक रहा था यह बात मेजर को भी अस्वभाविक लगी लेकिन मेजर बास्को को लेकर वहा से चले गये 
बास्को बार बार कादिर की दुकान की तरफ बढ़ने की कोशिश करता लेकिन मेजर राणा को लगा कि शायद बास्को की दिलचस्पी वहां रखे बिस्किटों में है 
कैंप पहुच कर मेजर ने उसे बांध दिया और पोस्ट पर चले गए लेकिन बास्को लगातर भौकता रहा 
घंटो की मशक्कत के बाद बास्को वहां से अपनी चैन तुडवा कर भाग निकला और सीधा कादिर की दुकान की तरफ बढ़ा उसे लग रहा था कि वहां कुछ तो गड़बड़ जरुर है जैसे ही वह गेट के पास पंहुचा तो उसने देखा कि कादिर उस अजनबी के साथ मिलकर पूरे क्षेत्र में विस्फोटकों का जाल बिछ्वा चुका था और थोड़ी ही देर में सेना का काफिला वहां पहुचने वाला था 
बास्को वतन को संकट में देख बिना वक़्त गवाये उस अजनबी पर टूट पड़ा और उसकी गर्दन पर अपने दांत गड़ा दिए यह देख गद्दार कादिर ने उस पर चाकू से कई वार किए लेकिन उसने अपने दांतों के घातक वार से  उस आतंकी को अधमरा कर दिया और पूरी ताक़त बटोर कादिर पर टूट पड़ा और उसे अपनी मजबूत पकड़ से रोके रखा 
सेना के काफिले में सबसे आगे चल रहे लेफ्टिनेंट शिंदे ने संदिग्धों को दूर से देख फौरन काफिले को रोक दिया और जब सेना की एक पैदल टुकड़ी वहां पहुची तो उन्होंने देखा की दोनों गद्दार विस्फोटकों के ढेर के बीच अचेत पड़े हुए है और अपनी आखिरी सांस तक लड़ने वाला सेना का वफादार बास्को शहीद हो गया है लेकिन उसने सैकड़ों सैनिकों की जन बचा ली 
लेफ्टिनेंट साहब ने बड़े गंभीर स्वर में कहा कि आज इस बेजुबान ने साबित कर दिया कि इंसानों से कहीं  बेहतर जानवर है जिनमे इंसानों से कही ज्यादा इंसानियत हैं 
अगर बास्को कुत्ता न हो के कोई इंसान होता तो शायद वीरता की इस अनोखी शौर्यगाथा को दुनिया के सामने आने में 20 साल का समय नही लगता 
कहानी 
शैलेश पाण्डेय    



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