कोम्प्लिकेटेड मेजबानी


मेरी बेकरारी बढ़ती ही जा रही थी ,.......
बढ़ती ही जा रही थी .......
और वो आ ही गई यानी मेरी छुट्टियाँ ........
आये हाय मस्त सोने और खाने मिलेगा 
तभी दरवाजें पर किसी ने दस्तक दी ,

      अरे यार मेरी छुट्टियाँ यह मेहमान क्यूँ आ जाते हैं ? बार–बार वो भी छुट्टियों में | आज तो मूवी का प्लान था वो भी गया तेल लेने और तो और मेरे पूरे दिन सोने के प्लान का पापड़ बन गया | पापड़ से याद आया माँ ने पापड़ तलने कहा था मेहमानों के लिए पर मैंने तो पापड़ तलते-तलते सारे पापड़ चट दिये ; अब क्या होगा....उमम्म्म ....... ये काम करो वो काम करो .....ह्ह्ह्ह 

एक फोन तो चार्ज हो नहीं पाता, दूसरों के फोन के कारण और उपर से ये अच्छा बनने का नाटक! वैसे बहुत एक्टिंग करनी पड़ जाती है सबके सामने..... पर कोई नई यार मै तो बचपन से एक्ट्रेस हूँ | हीहीही .......

अरे पता है ... ये नोटिस करने वाली बात है कि मेहमानों के भी कई प्रकार होते है जैसे चिल्हर मेहमान , कुछ दिन वाले मेहमान, कई दिन वाले मेहमान, मस्त वाले मेहमान अरे मै तो इस पर P.H.D. कर लूँ | हे.. हे.. 

  खैर हर चीज का अपना एक अलग ही मजा होता है और कुछ दिन साथ रहने के बाद मेहमानों से ही गहन लगाव हो जाता है, लगता था जिस दिन मेहमान जायेंगे त्यौहार मनाऊँगी पर ऐसा नही हो पाता | अब मैं जानी मेहमान नवाजी का महत्व .. मेहमानों से शरबत पूछने के बजाय फोन चार्ज है या नही ये पूछती हूँ , मेजबानी के नए पैतरें अपनाती हूँ | अपने से लगने लगते है वो अतिथि खैर अब उनके जाने का भी दिन आ गया “दिल में दुःख वाली खुजली हो रही” अब क्या जाना तो पड़ेगा उनको भी खैर एक पल की बात ये है कि जाने की बेला में आगे आकर विदा करना चाहिए क्यूंकि वो प्यार का नजराना देकर जाते है... पर कई बार माँ T.D.S. काटकर चिल्हर थमा देती है ... वही कचरा हो जाता है | मेरे तो फ्यूचर इन्वेस्मेंट के प्लान भी बन गये थे पर चिल्हर देख दिल को पिपरमेंट से ही बहला लिया मैंने | 



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