स्वाभिमान का जीवन


स्वाभिमान का जीवन

तरक्की की फसल मैं भी काट लेता
अगर औरों की तरह तलवे, मैं भी चाट लेता

बस मेरे लहज़े में जी हुज़ूर, नही था
इसके अलावा मेरा कोई कसूर नही था

मुश्किलें लाखों थी रास्ते में मेरे 
अपनों ने भी उपहास किये जख्मों पर मेरे

अगर पल भर के लिए भी मैं बे-ज़मीर हो जाता
तो इस शोहरत की दुनिया में मैं कब का अमीर हो जाता




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