इस कोर्ट मार्शल की दहलीज़ पर


इस कोर्ट मार्शल की दहलीज़ पर हूँ आज खड़ा मैं  जज साहब 
बस अपने दिल की आज यहाँ मै बात कहूंगा जज साहब 
सीज फायर का उल्लंघन 
मैं देख रहा था जज साहब 
कायरता का वह अभिनन्दन 
मैं देख रहा था जज साहब 
कुछ उम्मीदें मैने भी की थी 
कि अब पाक भी बाज आएगा 
वह मानवता के हत्यारे 
आतंकियों को सबक सिखाएगा 
सोते जवानो का सर कटने पर 
क्या यह खून न खौलता जज साहब 
क्या देश के हम रखवालों का 
कोई तार न डोलता जज साहब 
उन शहीदों की शहादत का जवाब देना जरुरी था 
उरी के उस खूनी मंजर का हिसाब लेना जरुरी था 
सर्जिकल स्ट्राइक की तर्ज पर मैंने यह काम किया है जज साहब 
मातृभूमि के दुश्मनों का घर घुस संहार किया है जज साहब 
कुछ तो जवाब देना था 
तब हद हो गयी थी जज साहब 
सरकारी अफसर शाहों की 
शांति वार्ता रद्द हो गयी थी जज साहब 
फिर हजारों की जान खतरे में देख
मैंने बन्दूक  उठाया जज साहब 
बॉर्डर को भेदने वालों को उनके घर घुस मैंने मार गिराया जज साहब 
गर हूं दोषी तो आज फांसी दे देना जज साहब 
अपनी इस मातृभूमि का दूं कर्ज चुका मैं जज साहब 
जब जब कोई कायर भारत की इस सेना को ललकारेगा 
तब तब कोई सरफिरा मेरे जैसा उन दुष्टों को संहारेगा 



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