फिलो अवे भाग-4


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दिनांक-12-04-2016             समय-8:37 PM

आज काॅलेज में अच्छा लग रहा था।मैंने उसे देखा,उसकी आँखें मुझे देख रही थीं लेकिन जैसे ही नजरे टकराई दोनों इधर-उधर  देखने लगे।आज बड़ी अजीब सी चमक थी उसकी आँखों में और दबी हुई खुशी भी।वह लड़की जिसे कुछ दिनों पहले मैं जानता तक न था आज वह सबसे अजीज लग रही थी।
   काॅलेज में आंतरिक मूल्यांकन चल रहा था।मैंने मूल्यांकन के बारे में फेसबुक पर उससे ढेरों बातें कीं।ऐसा लग रहा था जैसे मुझे वह दोस्त मिल गया है,जिसकी मुझे तलाश थी।मन की खुशी रह-रहकर  चेहरे पर आ रहीं थीं।मेरे अन्य दोस्त भी मुझे खुश देखकर खुशी का अनुभव कर रहे थे।आज कक्षा में पढ़ी वह बात याद आ गई कि-"मित्रता विचारों के मेल का परिणाम है"।मेरे मन में अपने आप ही पढ़ाई के प्रति एक उत्साह आ रहा था जो कहीं खो सा गया था।मैं उसमें वही सरलता ढूंढने की कोशिश कर रहा हूँ जो मुझमें है।
          
           to be continued.......



Comments

Timothyvok

Aw, this was a really nice post. In concept I wish to put in writing like this moreover – taking time and actual effort to make a very good article… however what can I say… I procrastinate alot and not at all appear to get something done. http://hellowh983mm.com