अच्छा लगता है!


मुझे तेरी याद में हर शाम जलना अच्छा लगता है,

मुझे मैखाने में हर रात बिताना अच्छा लगता है,

कुसूर तुम्हारा नहीं है मोहब्बत तो मैंने की थी तुमसे,

ये जानते हुए भी की तुम्हे मुझे रुलाना अच्छा लगता है,

फिर भी भूलना नहीं चाहता हूँ तुम्हे क्योंकि ,

मुझे तुम्हारी याद में तड़पना,

अच्छा लगता है।

 

मुझे मैखाने में हर रात बिताना अच्छा लगता है,

मुझे तेरी याद में हर शाम जलना अच्छा लगता है,

जानता हूँ तुम अमानत  हो किसी और की पर,

तुम्हे खुदा से माँगना अच्छा लगता है,

जानता हूँ की तुम मेरी कभी हो नहीं सकती पर,

फिर भी तुम्हे याद करके आँखें भीगा लेना

अच्छा लगता है,

 

मुझे मैखाने में हर रात बिताना अच्छा लगता है,

मुझे तेरी याद में हर शाम जलना अच्छा लगता है,

मुझे तुम्हारे संग बारिश में भीगने का ख़याल अच्छा लगता है,

मुझे तुम्हारी बातें खुद से करना अच्छा लगता है,

रह रह के तुम्हारे ख़याल में खो जाना मुझे,

अच्छा लगता है,

 

मुझे मैखाने में रात बिताना अच्छा लगता है,

मुझे तेरी याद में हर शाम जलना अच्छा लगता है,

मुझे तुम अच्छी लगती हो या,

 फिर तुम्हारा मुस्कुरा कर शर्मा जाना अच्छा लगता है,

नहीं जानता हूँ मैं और ना हीं जाना चाहता हूँ ,

मुझे तो बस तुम्हे देखते रहना अच्छा लगता है

 

                                 -समीर "इंकलाबी"

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Category : Nostalgia    14/02/2018


फिलो अवे भाग-4


मैं अगले पेज की ओर बढ़ चला---

दिनांक-12-04-2016             समय-8:37 PM

आज काॅलेज में अच्छा लग रहा था।मैंने उसे देखा,उसकी आँखें मुझे देख रही थीं लेकिन जैसे ही नजरे टकराई दोनों इधर-उधर  देखने लगे।आज बड़ी अजीब सी चमक थी उसकी आँखों में और दबी हुई खुशी भी।वह लड़की जिसे कुछ दिनों पहले मैं जानता तक न था आज वह सबसे अजीज लग रही थी।
   काॅलेज में आंतरिक मूल्यांकन चल रहा था।मैंने मूल्यांकन के बारे में फेसबुक पर उससे ढेरों बातें कीं।ऐसा लग रहा था जैसे मुझे वह दोस्त मिल गया है,जिसकी मुझे तलाश थी।मन की खुशी रह-रहकर  चेहरे पर आ रहीं थीं।मेरे अन्य दोस्त भी मुझे खुश देखकर खुशी का अनुभव कर रहे थे।आज कक्षा में पढ़ी वह बात याद आ गई कि-"मित्रता विचारों के मेल का परिणाम है"।मेरे मन में अपने आप ही पढ़ाई के प्रति एक उत्साह आ रहा था जो कहीं खो सा गया था।मैं उसमें वही सरलता ढूंढने की कोशिश कर रहा हूँ जो मुझमें है।
          
           to be continued.......

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Category : Nostalgia    16/10/2017


MOM



You are the sunlight in my day,

               You are the moon I see far away,

               You are the tree I lean upon,

               You are the one that makes trouble be gone.

               You are the one who taught me life,

               How not to fight, and what is right.

               You are the words inside my song,

               You are my love, my life, my mom.

               You are the one who cares for me,

               You are the eyes that help me see.

               You are the one who has helped me to dream,

               You hear my heart and you hear my scream.

               Afraid of life but looking for love,

               I’m blessed for god send you from above.

               You are my friend, my heart and my soul,

               You are the greatest friend I know.

               You are the words inside my song,

               You are my love, my life, my mom….

               Love and respect your mom

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Category : Thoughts    23/01/2018


वो पत्थर वो नज़ारे


कम-से-कम एक किलोमीटर ऊचाँ था वो पहाड़ और लगभग चार-पाँच किलोमीटर चौड़ा था,पर जाने क्यों इतने बड़े क्षेत्र में मुझे बस वो पत्थर हि दिखा। कोई चुम्बाकीय तत्व था शायद, जो मुझे अपने ओर खींचने का प्रयत्न कर रहा था । मैं बदहावास सी हो गयी थी, अब मेरे पैर रुकना नही चाहते थे , लग रहा था जल्द से जल्द वहाँ पहुचँ जाँऊ । पैरो ने अपनी रफ़तार अपनेआप बढ़ा लिया और फिर मेरे खयाल भी उस दौड़ में हिस्सा लेते हुए अपनी तेजी को बढ़ाने लगे, फर्क इतना-सा है कि पैरो की मंजिल वो पत्थर है और मेरे खयालो को अपनी मंजिल का पता हि नही पता । जिस कदर मै आगे बढ़ने के लिए अपने पैरो पर हिंसक होते जा रही थी उसी प्रकार मेरे खयालो का सागर मुझे पीछे बहाने के लिए ऊतारु था । मेरे खयाल एक सागर-सा रुप ले चुके थे , जिसका न कोई अंत था और न हि जिसके बिखराव को सामेटा जा सकता था । पुरानी यादे , जज्बात, अकेलापन ,सब आँखो के सामने चित्रित होने लगे , और वो चित्र अपने साथ-साथ उन्ही आँखो में नमी भी भर गए । एक कसमाकस-सी महसूस होने लगी थी , मै हाफँने लगी थी ,फिर मैं थोड़ी देर के लिए ठहरी ,मन को समझते हुए कहा हटा ना यार। मैंने फिर शरुवात की , भले ही मेरे  खयालो अब में ठहराव आ चुका था पर उस पत्थर तक पहुँचने का उत्साह अभी तक बरकारार था । अब की बार मेरे पैर चलना नही बल्कि दौड़ना चाहते थे चूंकि इस बार मेरे खयाल मुझ पर मेहरबान थे , हकीकत से परे सिर्फ सपने दिखाए और उन सपनो के बल मैं मंजिल तक पहुँच  गयी ।  अरे !  मन में था और होठो पर ये तो लाज्मी थावाली मुस्कान  थी । मानो मुझे मेरा मितान मिल गया हो , पूरे पहाड़ में सबसे बड़ा पत्थर था वो और उस पर खरोंचो के  निशान उसके बड़े होने की जिम्मेदारी साफ-साफ दर्शा रहे थे । हजारो पत्थर थे वहाँ पर अपनी जगह पर वह अकेला था , मै उसके और शायद अपने अकेलापन को दूर करना  चाहती थी सो मै उस पर बैठ गयी , धीरे से उसको सहलाते हुए उस पर अपना हाथ रखा । अब नज़र नज़ारो पर गयी ,थोड़ी देर के लिए मै स्थिर और दंग हो गयी थी , मै उन नज़ारो को देखने की खुशी लिखित मौखिक या  किसी भी रुप में व्यक्त नही कर सकती ।चारो तरफ पहाड़ो की हरियाली और उन पर  आने वाली बारिश की सफेद चादर ने मेरी नज़रो को तृप्त कर दिया था । मै बस  उन नजारो को निहारना चाहती अब , और  बस अपने बारे में सोचना चाहती थी , बस अपने बारे में । वो नजारा  भले दुनिया का सबसे खूबसूरत नज़ारा न हो पर मेरे लिए वो दृश्य देखना सबसे खूबसूरत एहसास था, क्योंकि उस जगह ने मुझे अकेलेपन की हकीकत और सपनो के भ्रम का एहसास करवाया था ।  मै वहाँ बसना  चाहती थी मै लीन हो चुकी थी ,तभी मेरे साथ आए मेरे दोस्त भी वहाँ पहुँच गए । मेरा ,पत्थर और उन नज़ारो का जुड़ाव उनके आते हि टूट गया ।हजारो सेल्फि  ने नज़ारो को कैद कर लिया था ,बेमन हि सही उन नजारो शायद अपने इस मितान के लिए खुद को सेल्फि में बसा लिया था । सब आगे की ओर बढ़ने लगे, मै नही जाना चाहती थी तभी  एक दोस्त ने चिल्लाकर बोला चल ना यार ,यहाँ घर नही बनाना है मैने कहा हाँ आती हुँ।उसे क्या पता वहाँ घर हि बनाना था मुझे, फिर मै उस पत्थर पर दोबारा बैठ गयी  उसने मुझे मैने उसे महसूस किया ,नज़ारो को फिर निहारा , आँखे थमना नही चाहती थी ,वो पत्थर और वो नज़ारे दोनो मुझे थामना चाहते थे । अपनी जिन्दगी में शायद पहली बार मै ठहराव लाना चाहती थी के तभी  फिर पीछे से आवाज़ आयी चल ना रे  । मै उठी ,धीरे-धीरे चलने लगी , पलट कर नही देखा । पत्थर  और नज़ारो से कुछ दूर आने के बाद मुझे रिमझिम –सी बुंदे महसूस हुई , मै खुश हो गयी क्योँकि उस पत्थर को , उन नज़ारो को बरसात के रूप में नया मितान मिल चुका था और शायद मुझे भी , उन दोनो को मेरी कमी नही खलेगी और शायद मुझे भी । वो बरसात हम तीनो को फिर जोड़ गयी...............    

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Category : Nostalgia    01/01/2018


ग़ज़ल (अख़िरी लम्हें)


बिछड़ कर तुमसे जीलें हमको दुआ ना देना
  अगर मेरी याद आए तो मुस्करा देना 

       दुआ कुबूल हो जाएगी ख़ुदा से कि हुई 
किसी रोते हुए को बस हँसा देना 

दौलत आजतक किसी का प्यार ना ख़रीद सकी 
किसी को यूँ ही मत ठुकरा देना 

ये लकीरें कल बताएंगी वो मेरी नहीं 
अच्छा है अभी इनको मिटा देना 

खेल अपनो से हो तो हार जाना तुम 
अच्छा तो नहीं अपनो को हरा देना 
                              Ankit kumar (9169703431) 



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Category : Nostalgia    05/11/2017


आओ कुछ बातें करते हैं



आओ   कुछ    बातें    करते   हैं   

 

आज   आखिरी    दिन    है        साल    का,

   कल    से    तारीख़े    भी    बदल    जायेंगी।

 

आओ    कुछ    देर    बैठते   हैं ,   बातें    करते    हैं,   

माना    कि    बहुत    दिन    से    कुछ  बात    नहीं    की    हमने,

मगर    कुछ    देर    बात    कर    लेने    से    कुछ    बिगड़    तो        जायेगा।   

 

शायद    कुछ    ग़लतफ़हमियाँ    थी    हमारे    बींच,

या    शायद    कुछ    गलतियाँ    अनजाने    में    हो    गयी    होंगी।   

 

आओआज    इस    आखिरी    दिन    को    थोड़ा    सा    हिसाब    कर    लेते    हैं ,   

दोनों    मिल    के,    एक    दूसरे    से,    एक    दूसरे    की    जी    भर    के    शिकायतें    लेते    हैं,

चीख़    लेते    हैं,    चिल्ला    लेते    हैं,    ज़रूरत    हो    तो    दो    चार    गालियाँ    भी    दे    देते    हैं,

 

मगर    जो    भी    आज    सब    हिसाब    कर    लेते    हैं।   

 

आज    अपने    दिलों    में    बसी    नफ़रतों    की    यहीं    कब्र    बना    देते    हैं,

या    गर    मंजूर    हो    तो    यहीं    चिता    जला    देते    हैं,

आज    इस    मंदिर-मस्जिद    के    मुद्दे    को    हमेशा    के    लिए    यहीं    दफ़न    कर    देते    हैं।   

 

कल    सुबह    में    मैं    अजान    दे    देता    हूँ,    तुम    भोर    में    मंत्रों    के    साथ    शंखनाद    कर    देना।   

 

आओ,    हम    दोनों    अब    साथ    मिल    के    लड़ा    करेंगे,

अब    हम    अपने    वतन    के    लिए    लड़ा    करेंगे,

 

आओ,    हम    अब    अपनी    मोहब्बत    के    लिए    लड़ा    करेंगे,   

अब    हम    अपनों    के    सुकून    के    लिए    लड़ा    करेंगे,

 

और    कसम    खाते    हैं    की    हम    अब    आपस    में        लड़ा    करेंगे।   

 

आओ    कुछ    देर    बैठते    हैं,   

आओ    कुछ    बातें    करते    हैं।

 

-समीर   "इंक़लाबी"

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Category : Nostalgia    31/12/2017


अश्को की ज़ुबान


मै रोना नही चाहती
आँसु अपने आप निकल गए
दिल में दबे मोम से अरमान
अश्को के रुप में पिघल गए ।
 
रोका अश्को को थामा अश्को को
पर ये तो आँखियन से बाहर आने को मछल गए
आँखियन  से जो बाहर ये निकले
भड़कती आग की चिंगारी से ये जल गए ।
 
किसी ने मोती समझा किसी ने मात्र पानी
खुशियो को मेरे वे निगल गए
पर अश्को की ठंडक ने सुकून भी दिया
और धीरे-धीरे हम संभल भी गए ।

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Category : Nostalgia    05/10/2017


चाँद प्यारा है बहुत


हाल जो भी है.. तुमसे बताऊँ कभी

  सोचता हूँ तुम्हें दिल से लगाऊँ कभी 

चाँद एक तू ही है जो बात करता है और दूर है हमसे 
सोचता हूँ कि तेरे पास मै आऊँ कभी 


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Category : Nostalgia    25/11/2017


मारकेट में नया


"मारकेट में नया" यह वाक्य ऐसे धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है कि,क्या कहें।सालो-साल पुरानी बात या वस्तु समाज में हर बार "मारकेट में नया" टैग चिपकाकर प्रसारित कर दी जाती है।सोशल मीडिया तो जैसे इन टैग चिपकी वस्तुओं की दुकान बन चुकी है जहाँ पुरानी वस्तुएँ हर बार नई बतलाकर बेच दी जाती है।

           अल्काइन चचा अपने जीवन के अंतिम पलो में "मारकेट में नया" से बहुत प्रभावित हुए थे।समाज में क्या नया है जानना चाहते थे।सो जैसे ही  चचा के प्राण पखेरू उखड़े,चचा सोशल मीडिया पर अटके।किसी चुटकुले पर सवार हो गए जिस पर "मारकेट में नया का जिक्र था।न जाने कितने ही अंधेरे रास्तों से गुजरे,कितने ही मिलो की डिजिटल यात्रा की तब उन्हें पता चला कि, वह चुटकुला तो दो वर्ष पुराना था।बेचारे चचा! अपना सा मुॅह लेकर रह गए।पुनः बड़ी सतर्कता एवं जाँच-पड़ताल के बाद किसी संदेश पर सवार हो गए।डिजिटल संजालो के मध्य,तारो से छेड़खानी करते हुए पुनः लम्बी यात्रा की तब उन्हें पता चला कि,वह संदेश  1 लाख  बार आदान-प्रदान हो चुका है।चचा के कुछ नए देखने की जिज्ञासा शांत नहीं  हो रही थी।चचा लोगों पर  झल्ला रहे थे- "कमबख्त आज तक मारकेट में नया कहकर लकीर पीटते थे  और हम कहते रहे की समाज तरक्की कर रहा है।अगर ये शोध कार्य हमारे द्वारा न किया जाता तो हम धोखे में चले जाते"।

लेकिन ये क्या चचा एकाएक झूम उठे,ये कैसा अजब सा विज्ञापन सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है।अरे ये तो सच में "मारकेट में नया" है।

      चचा इतने खुश हुए कि,प्रकाश के वेग से पृथ्वी लोक छोड़ परलोक चले गए।परलोक के पहरेदार ने उनसे वहां पहुँचने में देरी व उनकी खुशी के बारे में पुछा तब चचा बोले-"मियाँ! मारकेट में नया देखकर आ रहा हूँ।

पहरेदार-"क्या नया"?

चचा-"बरखुरदार आत्महत्या के 101 तरीके का विज्ञापन देख के आ रहा हूँ।देखना जल्द ही मेरे लोग यहाँ पहुँच जाएंगे।

पहरेदार-" मारकेट में जब भी कुछ नया आता है,यहाँ लोगों की तादाद बढ़ जाती है,हाल ही में ब्लू व्हेल के कारण आए थे,अब लाल व्हेल की वजह से आएंगे"।

                         ----प्रशांत गाहिरे-----

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Category : Nostalgia    27/09/2017


The 6th Convocation ceremony at GGV



The convocation ceremony is one of the most memorable and prestigious moment of a student’s life. The moment when all the degree seekers are filled with overflowing emotions; some glowing, few bursting out into tears others trembling with joy !

The convocation ceremony this year at Guru Ghasidas Vishwavidyalay was held after a gap of three years and turned out to be  the most grand ever convocation ceremony of all times. Lacs  were invested in making the event lavish. The chief guest of this year’s grand ceremony was the MHRD minister of the state and one of the renowned cabinet ministers of Chhattisgarh. The gold medallists of all the departments of the University were honoured and degrees were handed over to the students of batch 2014 – 15. The ceremony started from the VC bungalow as the faculty members of the executive council and academic council adorned in the traditional Indian kurta - pajama and turban marched to the Administrative Block where the event commenced with the lighting of the lamp.

The aura throughout the ceremony was mesmerizing. The students were excited for they were being rewarded for their long time achievements and nervous at the same time for they were to be presented before the renowned delegates. The achievers clicked lots of pictures and selfies and made lots of cherishable memories.

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Category : Uncategories    15/10/2017