अच्छा लगता है!


मुझे तेरी याद में हर शाम जलना अच्छा लगता है,

मुझे मैखाने में हर रात बिताना अच्छा लगता है,

कुसूर तुम्हारा नहीं है मोहब्बत तो मैंने की थी तुमसे,

ये जानते हुए भी की तुम्हे मुझे रुलाना अच्छा लगता है,

फिर भी भूलना नहीं चाहता हूँ तुम्हे क्योंकि ,

मुझे तुम्हारी याद में तड़पना,

अच्छा लगता है।

 

मुझे मैखाने में हर रात बिताना अच्छा लगता है,

मुझे तेरी याद में हर शाम जलना अच्छा लगता है,

जानता हूँ तुम अमानत  हो किसी और की पर,

तुम्हे खुदा से माँगना अच्छा लगता है,

जानता हूँ की तुम मेरी कभी हो नहीं सकती पर,

फिर भी तुम्हे याद करके आँखें भीगा लेना

अच्छा लगता है,

 

मुझे मैखाने में हर रात बिताना अच्छा लगता है,

मुझे तेरी याद में हर शाम जलना अच्छा लगता है,

मुझे तुम्हारे संग बारिश में भीगने का ख़याल अच्छा लगता है,

मुझे तुम्हारी बातें खुद से करना अच्छा लगता है,

रह रह के तुम्हारे ख़याल में खो जाना मुझे,

अच्छा लगता है,

 

मुझे मैखाने में रात बिताना अच्छा लगता है,

मुझे तेरी याद में हर शाम जलना अच्छा लगता है,

मुझे तुम अच्छी लगती हो या,

 फिर तुम्हारा मुस्कुरा कर शर्मा जाना अच्छा लगता है,

नहीं जानता हूँ मैं और ना हीं जाना चाहता हूँ ,

मुझे तो बस तुम्हे देखते रहना अच्छा लगता है

 

                                 -समीर "इंकलाबी"

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Category : Nostalgia    14/02/2018


आओ कुछ बातें करते हैं



आओ   कुछ    बातें    करते   हैं   

 

आज   आखिरी    दिन    है        साल    का,

   कल    से    तारीख़े    भी    बदल    जायेंगी।

 

आओ    कुछ    देर    बैठते   हैं ,   बातें    करते    हैं,   

माना    कि    बहुत    दिन    से    कुछ  बात    नहीं    की    हमने,

मगर    कुछ    देर    बात    कर    लेने    से    कुछ    बिगड़    तो        जायेगा।   

 

शायद    कुछ    ग़लतफ़हमियाँ    थी    हमारे    बींच,

या    शायद    कुछ    गलतियाँ    अनजाने    में    हो    गयी    होंगी।   

 

आओआज    इस    आखिरी    दिन    को    थोड़ा    सा    हिसाब    कर    लेते    हैं ,   

दोनों    मिल    के,    एक    दूसरे    से,    एक    दूसरे    की    जी    भर    के    शिकायतें    लेते    हैं,

चीख़    लेते    हैं,    चिल्ला    लेते    हैं,    ज़रूरत    हो    तो    दो    चार    गालियाँ    भी    दे    देते    हैं,

 

मगर    जो    भी    आज    सब    हिसाब    कर    लेते    हैं।   

 

आज    अपने    दिलों    में    बसी    नफ़रतों    की    यहीं    कब्र    बना    देते    हैं,

या    गर    मंजूर    हो    तो    यहीं    चिता    जला    देते    हैं,

आज    इस    मंदिर-मस्जिद    के    मुद्दे    को    हमेशा    के    लिए    यहीं    दफ़न    कर    देते    हैं।   

 

कल    सुबह    में    मैं    अजान    दे    देता    हूँ,    तुम    भोर    में    मंत्रों    के    साथ    शंखनाद    कर    देना।   

 

आओ,    हम    दोनों    अब    साथ    मिल    के    लड़ा    करेंगे,

अब    हम    अपने    वतन    के    लिए    लड़ा    करेंगे,

 

आओ,    हम    अब    अपनी    मोहब्बत    के    लिए    लड़ा    करेंगे,   

अब    हम    अपनों    के    सुकून    के    लिए    लड़ा    करेंगे,

 

और    कसम    खाते    हैं    की    हम    अब    आपस    में        लड़ा    करेंगे।   

 

आओ    कुछ    देर    बैठते    हैं,   

आओ    कुछ    बातें    करते    हैं।

 

-समीर   "इंक़लाबी"

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Category : Nostalgia    31/12/2017