वेदना



तन्हाइयों कि चादर ओढ़े,औरो से खुद को छुपाता हुँ।
आखो के गमगीन अंधेरे में,तुम्हे दिल के  करिब पाता हूं।।
वक्त की गहराइयों मे बसी,तेरी यादें तोड़ लाता हुं।
तेरी  झलक ही सही,झलकियों से मन बहलाता हुं।।
तेरी बातो कि फुलवारी पे,कोमल सी सरिता बहाता हुं।
गुमसुम करती जो बातें थी,उन्हें याद कर-कर भुलाता हुं ।
वो हौसला था वक्त का,जिसे थाम के मै रूक जाता हूं।
बेदना तो सिर्फ  अहसास था,तुझे खुद मे बसा पाता हुं।।

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Category : Uncategories    22/06/2017


अंजाने से....


1.उंची उठी लहरे हो तो ,गहराइयों से डरना क्या।
बुलंद हौंसले तो तो, आसमान की उंचाइयां देखते हैं।।
2.कहना है तुमसे,लब्ज ए जिंदगी से।।
किताबों के पन्ने सा हु ,पढ़ले कोई मुझे।।
3.मोहब्बत के समंदर से,कोई जाम ले आए जालिम।
वक्त की तकल्लुफ ही बताएगा,ये जहर है या जाम।।
4.ये जोर है मन का या सबब,जरा गौर आजमाइएगा। 
यहाँ जिंदगी से ज्यादा मौत कि किमत लगाई जाती है।।
5.ये जुल्फो कि अदाएं ,किसके लिए है।
और क्या कहुं ,नजरों ने कह दिया है।।"
6.जुल्फो मे सिमटना तो एक ख्वाहिश है,
अरमा तो कुछ और है बताऊँ क्या ??
7.अल्फाजों से कहना तो वक्त की नजाकत थी।
वरना अपनी आखों से जज्बात रोके से न रूके थे।।

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Category : Uncategories    22/06/2017